Tuesday, 4 December 2018

एक सत्संगी की रूह कहाँ तक जा सकती है ?




बड़े हुजूर महाराज जी से किसी सत्संगी ने पूछा -  हुजूर ! जहाँ से रूह को लाया गया है, क्या वहाँ वह बैगुनाह थी ?
    बड़े महाराज जी उत्तर देते हुए कहते है - बेशक ! ये रूहे अचेत पड़ी हुई थी, मालिक ने इन्हें इस सृष्टि में भेज

Wednesday, 28 November 2018

002 - रूहानी मार्ग की बातें - सिमरन भजन की बीमा पालिसी

1. थोडा थोडा किया भजन एक दिन बहुत ज्यादा बोनस के साथ हमें सतगुरू एक साथ देते है कतरे कतरे से तालाब और बूँद से सागर भरता है हम जो सेवा में मिटी की एक टोकरी उठाते है सतगुर हमें उसकी भी मजदूरी

Thursday, 22 November 2018

ईश्वर को कहाँ खोजना चाहिए ?


 ईश्वर को ढूँढ़ने के लिए, उसे प्राप्त करने के लिए हम नाना प्रकार के प्रयत्न करते हैं, पर उसे नहीं पाते, कहते हैं कि वह सर्वत्र है, वह सब जगह हैं, पर फिर भी हमें क्यों नहीं दीखता ? 

उसे प्राप्त करने को धन, वैभव, जीवन तक नष्ट करते हैं, पर पाते नहीं, अन्त में निराश हो कहते हैं कि-ईश्वर नहीं हैं। भाई ईश्वर हैं! पर उसे खोजने में गलती कर रहे हो, हम उसे धन वैभव से नहीं पा सकते, अगर उसे पाना हैं

Tuesday, 13 November 2018

हमे दुनिया को किस नज़र से देखना चाहिए ?



जो जैसा देखना चाहता है उसे दुनियां वैसी ही दिखायी देती है ! एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे । तभी एक राहगीर वंहा से गुजरा तो महात्मा को नदी में नहाते देख वो उनसे कुछ पूछने के

Tuesday, 6 November 2018

हमे संतोष कैसे आयेगा ?


एक समय की बात है शेख सादी कही जा रहे थे . सब जानते है के फकीरों के पास रूहानी धन के इलावा और कुछ नही होता है. दोपहर का समय था धुप बहुत तेज थी. शेख सादी धुप मे नंगे पाँव

Monday, 29 October 2018

हमारे कर्मो का लेखा जोखा कैसे काम करता है ?



जो बोयेगा वही पायेगा , तेरा किया आगे आयेगा .
कुछ वर्ष पूर्व एक बुजुर्ग महिला का देहान्त हो गया ;आस-पड़ोस के-रिश्तेदार सब इकठ्ठा हो गये ! doctor ने  भी Verify कर दिया कि She is deadदाह संस्कार के लिये जब शव को ले जाने लगे तो आश्चर्य की बात वह

Tuesday, 23 October 2018

001 - रूहानी मार्ग की बातें - कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।


1. कहते हैं कि नाम सिमरन का सही समय है अमृत वेले यानि सुबह 3.00 से  6.00, ये भी कहा जाता है कि सुबह-सुबह अमृत वेले गुरु सतगुरु दया महर की टोकरी  लेकर निकलते हैं और जो-जो भक्त उस वक़्त जागते हैं

Monday, 22 October 2018

आदमी को उस्ताद की क्यों जरूरत होती है ?

 

अंतर में सतगुरु से संपर्क बना रहने पर ही नाम का प्यार जाग्रत होता है। दुनियादारों की संगति से हमारी सुरत फिर इंद्रियों में आ गिरती है। इसलिए गुरु की संगति या सत्संग परम् आवश्यक है। गुरु के प्यार से हमें जगत का मोह छोड़ने और अंदर जाने की शक्त्ति प्राप्त होती है।

Friday, 5 October 2018

ईश्वर की बंदगी में सबर का क्या महतव है ?


बहुत समय पहले की बात है, एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी।

Saturday, 22 September 2018

हमारा ध्यान सिमरन में क्यों नहीं लगता ?



हम सत्संगों में और संत महात्माओं के मुखाग्र से सुनते आते हैं, कि चलते-फिरते उठते-बैठते अपनी लिव नाम के सिमरन के साथ जोड़ के रखो


बहन या माँ किचन में हो या घर का काम काज करते हुए सिमरन करे। भाई दुकान या ऑफिस में भी अपने ख्याल को सिमरन के साथ जोड़ के रखें। लेकिन संत महात्मा ये भी कहते हैं कि ऐसे नाम का सिमरन

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