Friday, 3 July 2020

103 - अमृत वेले में उठने के लिए रात्रि सोने का रूटीन क्या होना चाहिए ?


अमृत वेले में उठने के लिए रात्रि सोने का रूटीन भी ठीक करने की जरुरत है.

महाराज जी ने नींद के विषय में फ़रमाया था “गुरुमुखों के लिए 4 घंटे की नींद काफी होती है, 6 घंटे वो सोये जो भारी भरकम काम करता हो.”, इन वचनों के हिसाब से 6 घंटे आखिरी सीमा है. बाकी अपने शरीर, परिश्रम और

Friday, 26 June 2020

102 - संत सिमरन कब करते हैं ?

एक बार पूजय कबीर साहिब जी से किसी ने पूछा आप दिन भर कपड़ा बुनते रहते हैं तो मालिक सतगुरु का

Saturday, 20 June 2020

101 - गुरु क्या है ?



गुरू एक तेज हे, जिनके आते ही, सारे सन्शय के अंधकार खतम हो जाते हैं .


गुरू वो मृदंग है, जिसके बजते ही अनाहद नाद सुनने शुरू हो जाते है. 

Saturday, 13 June 2020

100 - सेवक ने पूछा भाई तुम कहाँ जा रहे हो ?

एक सेवक ने अपने गुरू को अरदास की, जी मैं सत्सँग भी सुनता हूँ, सेवा भी करता हूँ, मग़र फिर भी मुझे कोई फल नहीं मिला , सतगुरु ने प्यार से पूछा, बेटा तुम्हे क्या चाहिए ?

Saturday, 6 June 2020

099 - हमे सच्चे सन्त-महापुरुषों की संगति में क्यों जाना चाहिए ?

एक सेठ बड़ा साधु सेवी था। जो भी सन्त-महात्मा नगर में आते वह उन्हें अपने घर बुला कर उनकी सेवा करता। एक बार एक महात्मा जी सेठ के घर आये। सेठानी महात्मा जी को भोजन कराने लगी।

Friday, 29 May 2020

098 - रुह को अन्दर जानें में कोनसी रुकावट है ?


"कर नैनों दीदार महल में प्यारा है।"  इस शब्द के द्वारा कबीर साहब नें अन्दर का भेद जितना खोला है उतना किसी भी संत ने नहीं खोला। इस पर सतसंग करते हुए महाराज सावन सिंह जी फरमाते हैं :

Sunday, 24 May 2020

रूहानी मार्ग की बातें - क्या हमें सचखंड जाने के लिए चार जन्म लेने पड़ते है ?

बाबा सावन सिंह जी कहते थे यह कोई जरूरी नहीं की सचखंड जाने की लिए चार जन्म लेने पड़ते है ।  हमने सत्संग में सगंत को समजाने के लिए कहा था।  महाराज जी ने कहा कि चार बार जनम

Sunday, 17 May 2020

097 - हमे संतो से क्यों नहीं मांगना चाहिए ?

रामायण में बहुत अच्छी शिक्षा मिली . एक ऋषि राम जी को कोई वरदान मांगने के लिए बोलते है, पर राम जी उनसे क्षमा मांगते हुए बोलते

Friday, 8 May 2020

096 - असली संन्यासी कोन है ?



एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं. जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था ।
राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा

Friday, 1 May 2020

095 - हम कैसे विषय - विकारो में उलझ कर परमात्मा को भुलाए बैठे हैं ?



एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया तो रास्ते में क्या देखता है कि एक छोटा बच्चा माटी के खिलौनो को कान में कुछ कहता फिर तोड कर माटी में मिला रहा है। राजा को बडा अचरज हुआ तो उसने बच्चे से पूछा

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