Friday, 25 September 2020

113 - हमे दुःख और तख़लीफ़ क्यों आते हैं ?

गुरु का सच्चा सिमरन करने से आहिस्ता-आहिस्ता हमारे अंदर इतनी सहनशीलता आ जाती है की हम बिना संतुलन खोए जीवन में आनेवाले

Sunday, 20 September 2020

112 - पक्के साधक कैसे बने ?

एक बार एक गुरूजी, अपने शिष्यों को भक्ति का उपदेश देते हुए समझा रहे थे कि  "बच्चों पक्के साधक बनो, कच्चे साधक ना बने रहो।

Saturday, 12 September 2020

111 - सत्संग की तडप या बेचैनी क्यां होती है ?

 

आज कल सभी के मन में एक ही प्रश्न - संगत कब शुरू होगी? जो भी मिल रहा है यही कहता है की संगत के बगैर बहुत बेचैनी हो रही है। मन नहीं लग रहा है। अजीब सी बैचैनी है जो पहले कभी नहीं

Saturday, 5 September 2020

110 - परमात्मा के साथ मिलाप कैसे हो सकता है ?

 एक बादशाह का वजीर बहुत बुद्धिमान और परमार्थी विचारों वाला था। एक दिन बादशाह ने वजीर से पूंछा कि, परमात्मा के साथ मिलाप कैसे हो सकता है ? वज़ीर ने कहा कि, परमात्मा स्वयं

Saturday, 29 August 2020

109 - निंदा करने का फल कैसे मिलता है ?


 एक बार की बात है की किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी और ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए।

Friday, 21 August 2020

रूहानी मार्ग की बातें - क्या तुम सचखंड जाना चाहते हो ?

 

महात्मा बुध किसी गांव में 30 साल से सत्संग कर रहे थे,  एक आदमी ने महात्मा बुध से सवाल किया कि आप इतने सालो में कितने आदमियों को सचखंड पहुंचा दिया है और सत्य का मिलन करवा दिया है .

Friday, 14 August 2020

108 - काल ने एक सत्संगी कैसे सत्संग में पहुँचाया ?

 एक शख्स सुबह सवेरे उठा साफ़ कपड़े पहने और सत्संग घर की तरफ चल दिया ताकि सतसंग का आनंद प्राप्त कर सके,चलते चलते रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा, कपड़े कीचड़ से सन गए वापस घर आया.

Saturday, 8 August 2020

107 - क्या सुख-दुख हमारे कर्मो का फल है ?

हम कौन होते हैं मालिक के काम में दखल अंदाज़ी करने वाले जो कुछ हो रहा है, उस मालिक की मर्ज़ी से ही तो हो रहा है. इसलिये कभी जीवन में दुःख भी आ जायें तो चिन्ता नहीं करनी चाहिये क्योंकि उसकी गत वो ही जाने,

Friday, 31 July 2020

106 - साधु के संगति का असर क्या होता है ?

एक चोर राजमहल में चोरी करने गया, उसने राजा-रानी की बातें सुनी । राजा रानी से कह रहे थे कि गंगा तट पर बहुत साधु ठहरे हैं, उनमें से किसी एक को चुनकर अपनी कन्या का विवाह कर देंगें । यह सुनकर चोर साधु का रुप धारण

Monday, 27 July 2020

105 - संसार किसी के लिए भी नही रुकता

एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता। उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता। वह लोगों के सामने डींग हांका करता था।

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