Monday, 9 December 2019

078 - भजन सिमरन की अपॉइंटमेंट क्यों जरूरी है ?

अक्सर यह देखा जाता है कि जब हम किसी से मिलना चाहते हैं तो हम आमतौर पर समय तय करते हैं या मिलने के लिए अपॉइंटमेंट फिक्स करते हैं। इसके अलावा जब कोई हमसे मिलना चाहता है तो वे हमारी उपलब्धता के बारे में हमारी जांच करते हैं और अपोंटमेंट प्राप्त करते हैं। एक बार मीटिंग और समय तय होने

के बाद, हम आम तौर पर सुनिश्चित करते हैं कि हम निर्धारित समय पर जरूर मिल पाएं। कल्पना कीजिए कि आपको किसी से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट मिली है और जब आप वहां जाते हैं तो वह वहां पर मिले ही ना, तो हमें कैसा महसूस होगा। हम बहुत बुरा महसूस करते हैं। हम उदास महसूस करते हैं।

उसी तरह एक जोड़े को बाबाजी के कहे अनुसार भजन सिमरन करने की आदत थी। ऐसा लगता था कि मानो उन्होंने सतगुरु  से अपॉइंटमेंट फिक्स कर रखी थी। चाहे कुछ भी हो जाए, वे दोनों निर्धारित समय पर भजन सिमरन जरूर करते थे क्यूंकि वो समझते थे कि इस समय पर हमारी बाबा जी से अपवायंटमैट फिक्स है और बाबा जी हमारा इंतजार कर रहे होंगे । बाबा जी कभी निराश नहीं करते। इस पति और पत्नी को एक विशेष समय पर सुबह उठने और भजन सिमरन में बैठने की आदत थी। आम तौर पर पति थोड़ी देर के लिए बैठता था और उठ जाता था,  लेकिन पत्नी भजन सिमरन के लिए पूरा समय देती थी। वह लंबे समय तक बैठती थी। यह पति अपनी पत्नी के बारे में बहुत खुश था। 

पति का हर रोज  एक नियम था कि जैसे ही उसकी पत्नी भजन सिमरन करके उठती वह पीने के लिए उसके पास एक कप चाय तैयार रखता था। ऐसा बहुत दिनों  और महीनों के लिए चला। जैसे ही पत्नी भजन सिमरन  बाद अपनी आंखे खोलती, वो अपने सामने चाय के साथ पति को मुस्कुराते हुए पाती। वे दोनों अपनी इस दिनचर्या का पूरा पालन कर रहे थे। एक दिन पत्नी उठती है। वह देखती है कि उसके पति अभी उठे नहीं है। वह उसके पास जाती है  अपने पति को मृत पाती है। उसे एकदम बहुत बड़ा सदमा लगता है। 

वह खुद से कहती है कि मेरा भजन सिमरन का भी समय हो रहा है क्यूंकि बाबा जी के साथ अपॉइंटमेंट फिक्स है। अब मैं क्या करूं ? वह रोती है। लेकिन फिर वह बाबाजी से प्रार्थना करती है कि मैं अपना कर्तव्य पूरा करूंगी कृपया मुझे माफ़ कर दो। अगर मैं फ़ोन कॉल करती हूं तो सब रिश्तेदार दोस्त आना शुरू कर देंगे और मैं भजन सिमरन पूरा नहीं कर पाऊंगी। मजबूत दिल और आंखों में आसूं के साथ वह अपने पति को एक बेडशीट से ढंकने बाद,भजन सिमरन मे बैठ गई। और पूरे ढाई घंटे आसूं भरी आंखों से भजन सिमरन किया। ढाई घंटे के बाद उसने सबको दुखद समाचार देने लिए आंखें खोली। जैसे ही वह अपनी आंखें खोलती है तो अपने सामने चाय  के साथ अपने पति को मुस्कुराता हुआ पाती है।

जब हम अपना कर्तव्य पूरा करते हैं तो वह भी हमें कभी निराश नहीं करता है। वह अपने वचन को पूरा करता है कि मैं तुम्हारे साथ हूं और तुम्हे कभी निराश नहीं होने दूंगा। यह हमें समझने और विश्वास करने की आवश्यकता है।
हमें भी हर रोज बिना नागा भजन सिमरन इस सोच के साथ करना चाहिए कि बाबा जी के साथ हमारी अपॉइंटमेंट फिक्स है, हम बैठे या ना बैठें वो हमारा इंतजार जरूर करेंगे।

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