Thursday, 4 July 2019

रूहानी मार्ग की बातें - काश की मेरे ऊपर भी इतनी दया-महर हो जाये

1. जो व्यक्ति लगातार अंदर सिमरन-अभ्यास करते रहने की आदत डाल लेता है, उसे बड़ा सुकून मिलता है और उसे लगातार सिमरन करते रहने की इतनी जबरदस्त आवश्यकता महसूस होती है कि वो इसके बिना रह
ही नहीं सकता.

2. काश की मेरे ऊपर भी इतनी दया-महर हो जाये . हमें भजन-सिमरन कुछ देखने या कुछ सुनने के लिए नहीं करना चाहिए , बल्कि इसलिए करना चाहिए कि हमारा प्रभु से प्यार है और हमारे सतगुरु यही चाहते हैं कि हम यह अभ्यास करें.

3. हम समझते हैं कि हम सतगुरू से प्यार करते हैं ।असल में सत्गुरू ही हमारे अंदर यह प्यार पैदा करता है । साई बूलेशाह ने कहा है: "आपै लाईया कुंडीया तू ,आपै खिचदा डोर "
प्यार शूरू करने वाला भी सतगुरू है और इसको बरकरार रखने वाला भी सतगुरू है । हम समझते हैं कि हम परमात्मा की भक्ति करते हैं पर वो खुद हमसे अपनी भक्ति करवा रहा है। वो ही परदे पिछे बैठा डोर खींच रहा है। हम सिर्फ पुतलीया है और वो जैसे चाहता है हमें अपने प्रेम का नाच नचाता है कई बार हम खुश होते हैं और मान करते हैं कि हम परमात्मा को प्यार कर रहे है। पर यह प्यार असल में हमारा नहीं सतगुरू का पैदा किया होता है।

4. रात को जागना - संत रात को जागने के लिए बोलते हैं कियोकि मन शैतान अगर आप दिन में इसकी चोकसी रखते तो ये सपने में आप से कोई ऐसा खोटा कर्म करवाने की कोसिस करता ह, जिससे आपके कर्मों का बोझ बडे  उस कर्म की भी उतनी सजा जितने जागते हुए में किए कर्मो की।

5. मालिक दी मोहब्बत असली मोहब्बत है इन्सान के लिए ऊंची निहमत है। जिस पर दया करे उस पर बख्शीश होती है दिल मे मालिक की मोहब्बत पैदा करने के लिये इन्सान के अंदर मुरशद की मोहब्बत का पैदा होना ज़रूरी है जो गुरु का प्रेम दिल मे होता है तो तू  यकीन रख कि रब भी तेरे नाल प्यार करता है

▪सतगुरु तेरा शुक्र है,शुक्र है▪

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